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Friday, May 23, 2014

'देश कठपुतलियों के हाथ में' का विमोचन


ग्वालियर। गणेश शंकर विद्यार्थी मंच और दूरस्थ शिक्षण अध्ययनशाला, जीवाजी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पत्रकारिता पर केन्द्रित संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय है 'पत्रकारिता, राजनीति और देश'। आयोजन ग्वालियर में जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में २४ मई को सुबह १०:३० बजे किया जाएगा। इस मौके पर युवा पत्रकार, साहित्यकार एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रोडक्शन सहायक लोकेन्द्र सिंह की पुस्तक 'देश कठपुतलियों के हाथ में' का विमोचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि देश के जाने-माने चिंतक एवं विचारक डॉ. वेदप्रताप वैदिक मौजूद रहेंगे और अध्यक्षता गांधीवादी चिंतक रघु ठाकुर करेंगे। 
पुस्तक के लेखक लोकेन्द्र सिंह स्वदेश, दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में लम्बे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में श्री सिंह माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में पदस्थ हैं। श्री सिंह साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रीय हैं। उनकी यह किताब समय-समय पर लिखे गए उनके राजनीतिक आलेखों का संग्रह है। पुस्तक का आवरण पृष्ठ ग्वालियर के युवा पत्रकार एवं कार्टूनिस्ट राजदिल शिवहरे ने तैयार किया है। शोध एवं जागरूकता के क्षेत्र में सक्रीय संस्था स्पंदन ने पुस्तक को प्रकाशित किया है। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने पुस्तक की प्रस्तावना एवं वरिष्ठ पत्रकार लोकेन्द्र पाराशर ने आमुख लिखा है। विमोचन समारोह में देश के जाने-माने साहित्यकार एवं प्रेमचंद सृजन पीठ उज्जैन के निदेशक जगदीश तोमर, प्रख्यात राजनीतिक विचारक संजय द्विवेदी, नईदुनिया ग्वालियर के संपादक अनूप शाह और दैनिक भास्कर ग्वालियर के संपादक सुनील शुक्ला सहित प्रबुद्ध लोग मौजूद रहेंगे।

Friday, February 28, 2014

व्यं‍ग्यस्ते का हुआ इटावा में लोकार्पण

इटावा, उ.प्र.- नगर में मोतीझील स्थित सरस्वती शि‍शु मंदि‍र वि‍द्यालय में बुधवार दिनाँक 26 फरवरी, 2014 को आयोजि‍त कार्यक्रम के दौरान व्यं‍ग्य विधा पर आधारि‍त पुस्तक व्यं‍ग्यस्ते का लोकार्पण कि‍या गया। पुस्तक के लेखक दि‍ल्ली‍ एंथम, दामि‍नी एंथम व इटावा एंथम के रचयि‍ता सुमि‍त प्रताप सिंह हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अति‍थि‍ डा. दि‍नेश पालीवाल ने कहा कि‍ जो वक़्त से खबरदार नहीं है, वह चाहे कुछ भी हो रचनाकार नहीं। साथ ही कहा कि‍  सोचना यह है कि‍ वक़्त हमें लि‍खने के लि‍ए मजबूर क्यों करता है। डा.शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि‍ लेखक और शि‍‍क्षा देश की दशा और दि‍शा बदलने में सक्षम हैं और कि‍ताबों के जरि‍ए इति‍हास और वि‍चारों को बदला जा सकता है। सदैव व्यक्ति को तकनीक के साथ चलना चाहि‍ए। पुस्तकों के माध्यम से प्रचार-प्रसार का तरीका पुरातनकाल से अभी तक चला आ रहा है और इसकी उपादेयता एवं प्रासंगि‍ता कम नहीं हुई है। वि‍चारों को जनमानस में पहुंचाने के कार्य में पुस्तकें अत्यंत उपयोगी माध्यम हैं। 
वि‍द्यालय प्रबंधक श्रीकृष्ण वर्मा ने व्यंग्यस्ते पुस्तक के लेखक सुमि‍त प्रताप की सराहना करते हुए कहा कि‍ इटावा कवि‍ ‘देव’ और ‘गंग’ की भूमि‍ है और इस वि‍धा को आगे बढ़ाने का जो कार्य इटावा में जन्मे सुमि‍त प्रताप ने कि‍या है, उससे लगता है कि‍ इनके ऊपर माँ सरस्वती की कृपा है। उन्होंने आगे कहा कि‍ भले ही बड़ी- बड़ी डि‍ग्रि‍यां मि‍ल जायें, लेकि‍न मां सरस्वती का वरदहस्त सुमि‍त जैसे लोगों को ही मि‍लता है। अध्य‍क्षता करते हुए श्रीकालीबाड़ी मंदि‍र के महंत शि‍वानंद ने कहा कि‍ सुमि‍त देश ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्‍ट्रीय फलक पर चमकें। साथ ही कहा कि‍ इटावा ऐसी भूमि‍ है इस पर कि‍या गया हर कार्य सि‍द्ध और सफल होता है। सुमि‍त प्रताप ने अपने  विचार रखते हुए कहा कि‍ व्यंग्यस्ते में पत्र शैली में कुल 42 व्यंग्य संकलित हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम में घोषणा की कि जब भी उनकी नई पुस्तक प्रकाशित होगी, तो वह उसका लोकार्पण इटावा में भी किया करेंगे।
इस लोकार्पण कार्यकम के दौरान डा. आशीष दीक्षि‍त, आशीष वाजपेई, वि‍वेक रंजन गुप्ता, आशुतोष त्रिवेदी, अवनीन्द्र जादौन, राजेश जादौन के अलावा वि‍द्यालय परि‍वार की ओर से शि‍क्षकगण भी मौजूद रहे।

Friday, February 21, 2014

कोई मैं झूठ बोलया का लोकार्पण

दिल्ली का प्रगति मैदान इस समय लेखकों का अखाड़ा बन रखा है. जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले की. यहाँ रोज नई-नई पुस्तकें लोकार्पित होकर पाठक गणों तक पहुँच रही हैं. इसी क्रम में प्रसिद्द वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं व्यंग्य विधा को समर्पित प्रसिद्द पत्रिका "व्यंग्य यात्रा" के संपादक प्रेम जनमेजय की नई पुस्तक “कोई मैं झूठ बोलया" का लोकार्पण दिनाँक 19.02.14 को लेखक मंच पर किया गया.  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ व्यंग्यकार नरेंद्र कोहली ने तथा वक्ता के रूप में उपस्थित थे वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रदीप पन्त, सुभाष चंदर एवं कहानीकार सूरज प्रकाश तथा संचालन किया कौशलेन्द्र प्रपन्न ने. इस कार्यक्रम में पदम श्री अशोक चक्रधर ने अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज की व अपने वक्तव्य से प्रेम जनमेजय को उनकी नई पुस्तक हेतु शुभकामनाएँ अर्पित कीं. इस अवसर पर प्रेम जनमेजय ने इसी पुस्तक में संकलित व्यंग्य बेशर्ममेव जयते का पाठ किया, जिसे वहाँ उपस्थित जनसमूह ने काफी सराहा. इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक लालित्य ललित, लेखिका सरिता भाटिया, युवा हिन्दी लेखिका संगीता सिंह तोमर एवं अन्य व्यंग्य प्रेमी उपस्थित थे.


Sunday, February 9, 2014

सेवा भरती में बसंत उत्सव

बसंत पंचमी का दिन इस बार मेरे लिए बहुत आनंद्नीय रहा | सेवा भारती जोकि एक संस्कारी संस्था है जो बस्तिओं में बच्चों के चरित्र निर्माण के इलावा महिलाओं में भी आत्मविश्वास पैदा करती है | इसमें बसंत उत्सव एक अलग तरीके से मनाया गया | कल सुबह 11 बजे रघुबीर नगर में सेवा भारती के केंद्र पर पहुंचना था | मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच गई थी | उसमें अन्दर प्रवेश करते ही जैसा की एक अपनापन सा नज़र आने लगा | ऊपर काफी बड़ा हाल था जिसमें प्रोग्राम होना था | उसके बाहर सबने पंक्तिओं में चप्पल जूते निकाल दिए थे | अन्दर प्रवेश करते ही सारा आलम रंगीन नज़र आने लगा जैसे इन्द्र धनुषी छटा बिखेर दी गई हो | सब महिलायें इन्द्रधनुषी नज़र आ रही थी | 
यहाँ बसंत उत्सव पर भजन प्रतियोगिता का कार्यक्रम रखा गया था | जिसमें 6 जिलों की महिलाएं भाग लेने पहुँची थीं | नजफगढ़ ,उत्तमनगर ,सुभाष नगर , जनकपुरी , द्वारका ,तिलकनगर 6 जिले इसमें आए थे |यह एक विभाग का कार्यक्रम था |  
हर जिले से दो दो टीम आई थीं सबका अपना एक ड्रेस कोड था | सभी बहुत ही व्यवस्थित रूप से कमरे में बिछी दरिओं पर बैठी थी | हम सब निरीक्षिकायें और जज कुर्सिओं पर बैठे थे | सामने माँ सरस्वती की प्रतिमा रखी गई थी | महिलाएँ क्योंकि सुबह से निकली थी दूर दूर से इसमें भाग लेने के लिए इसलिए आते ही उनको हल्का फुल्का चाय नाश्ता दिया गया था | कुछ जज समय पर नहीं पहुँच पाए थे इसलिए उनका इंतज़ार किया जा रहा था क्योंकि उनकी कोशिश थी जो जज हों वो दूसरे विभाग से ही हों तो बहुत अच्छा रहेगा | 
                    उतनी देर सब भाग लेने वाली मंडलिओ को एक भजन का एक एक अंतरा बोलने के लिए कहा गया अपने अपने वाद्दय के साथ | बहुत ही सुन्दर भजन सुनने को मिले | सबको उनकी कमिओं के बारे में बताया गया | इतना सब होने में 12.25 हो चुके थे तब तक जज भी पहुँच चुके थे |  
           अब शुरू हुई सुबह से परीक्षित भजन प्रतियोगिता | सबसे पहले उसके कुछ नियम उन सबको समझाए गए जो निम्नलिखित हैं .....
1. कोई भी फ़िल्मी भजन या फ़िल्मी धुन पर भजन नहीं होना चाहिए |
2. भजन 5 से 7 मिनट के बीच ख़त्म हो जाना चाहिए |
3. भजन सब अपनी ढोलक और कोई भी एक और वाद्द्य यंत्र के साथ गया जाना चाहिए |
             प्रतियोगिता शुरू करने से पहले सभी जज द्वारा  दीप प्रज्वलित किया गया | अब एक अध्यापिका ने संभाला माइक और गणेश वंदना गाई उसके बाद एक एक मंडली को बड़े सलीके से स्टेज पर बुलाया गया और उनका भजन सुना गया | एक अध्यापिका समय का ध्यान रख रही थी बाकी सब उनको उत्साहित करने के लिए भजन ख़तम होते ही ताली बजवाते और फिर दूसरी मंडली के सदस्यों को आमंत्रित किया जाता स्टेज पर | जब सब मंडलियाँ गा चुकी तो परिणाम घोषित करने से पहले एक जज ने आकर उनको समझाया कि किस प्रकार से नंबर दिए गए हैं जैसे कि ड्रेस कोड के 2 नंबर बताये गए थे फ़िल्मी धुन पर नंबर काटे गए थे या किसी  का भजन सरल भाषा में नहीं था तो उसके भी नंबर काटे गए थे ,कोई मंडली में अगर सारे लोग नहीं गा रहे थे , लय में नहीं गा रहे थे तो उनके नम्बर काटे गए थे |
                    इसके बाद परिणाम घोषित किया गया जिसमें हमारी उत्तमनगर की एक मंडली को प्रथम और तिलकनगर जिले की एक मंडली को द्वितीय घोषित किया गया | मंडली के सभी सदस्यों एवं बाकी सब मंडलियो को भी एक एक बेडशीट उपहार स्वरुप दी गई थी | अब दो चुनी हुई मंडलियाँ अपने भजन लेकर फाइनल में झंडेवालान मंदिर में प्रतियोगिता में शामिल होंगीं |
           सब इसके बाद जाने के लिए नीचे आ गए यहाँ बड़े व्यवस्थित तरीके से सबको बासंती चावल और नमकीन चावल दिए गए जिसे लेकर सब मधुर यादों संग वापिसी के लिए चल दिए |
वहाँ की कुछ तस्वीरें आप तक पहुंचाती हूँ ....














                                                        रिपोर्टर :--- सरिता भाटिया 

Tuesday, January 28, 2014

ज़किया ज़ुबैरी के कहानी संग्रह साँकल का विमोचन


शुक्रवार दिनाँक 24 जनवरी, 2014 को इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी में लन्दन, ब्रिटेन में रहनेवाली लेखिका ज़किया ज़ुबैरी के कहानी संग्रह साँकल का लोकार्पण किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे चर्चित व्यंग्यकार व व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय. कार्यक्रम की अध्यक्षता की प्रो. गंगा प्रसाद ने. संयोजक की भूमिका में लंदनवासी कहानीकार तेंजेद्र शर्मा थे व इस कार्यक्रम के संचालन की बागडोर संभाली कथाकार अजय नावरिया ने. 


कार्यक्रम का शुभारंभ तेजेन्द्र शर्मा ने ज़किया के कहानी संग्रह पर बीज वक्तव्य देकर किया. उन्होंने ज़किया की विभिन्न कहानियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की व बताया कि गंगा-जमुनी तहजीब की भाषा में लिखी गईं उनकी कहानियों में मानवीय रिश्तों एवं समस्याओं के साथ राजनीतिक उठा-पटक की झलक भी मिलती है. इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे. 

जहाँ अध्यक्ष महोदय ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मान्य हुई हिन्दी की शिखरवर्ती कहानियों को प्रवासी एवं गैर प्रवासी खेमे में बाँटने की जरूरत नहीं है. हिन्दी में अच्छी कहानियाँ कहीं भी और कभी भी लिखी जा सकती हैं, वहीं मुख्य अतिथि ने कहा कि प्रवासी लेखन में मूल देश से दूर होने और वहाँ की यादों के अलावा अब अपनाए गए मुल्क की समस्याओं का वर्णन भी आने लगा है. प्रवासी लेखक आज जिस प्रकार की समस्याओं का सामना परदेश में रहकर महसूस कर रहे हैं, वैसी समस्याएं अब अपने देश भारत में भी उत्पन्न होने लगीं हैं, क्योंकि जीवन मूल्यों में हुए क्षरण पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएँ अब हर देश की समस्या बन चुकी हैं. 


ज़किया की कहानियों पर डॉ. अल्पना मिश्र व प्रो. सत्यकेतु ने भी अपने सुंदर विचार रखे. 


इसी कार्यक्रम के दौरान ज़किया ज़ुबैरी ने अपनी रचना प्रक्रिया के विषय में बताते हुए कहा कि उनका लिखना पहले से तय नहीं होता. उन्होंने बताया कि वो पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से वक़्त निकालकर कहानियाँ लिखती हैं. उन्होंने मासूमियत से स्वीकार किया कि उन्हें नहीं मालूम कि उनकी कहानियों में क्या खूबियाँ हैं, लेकिन उनकी कहानियों के कथानक व किरदार सच्चे हैं. इस दौरान उनके द्वारा बताई गई बचपन में शिव भगवान की काँच की कलाकृति बेचकर अपना जेब खर्च निकालने की बात से उनके बचपन से ही आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी होने की उनकी एक अन्य खूबी का भी पता चला.

इस प्रकार अजय नावरिया के सफल संचालन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस अवसर पर राजकमल से अशोक माहेश्वरी, कवियित्री ममता किरण, वरिष्ठ कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडे, राजीव तनेजा, वंदना गुप्ता, विवेक मिश्रा, नमिता राकेश, गीता श्री, रूपा सिंह, हीरालाल, डॉ. सुनीता,  सुबोध कुमार एवं भरत तिवारी इत्यादि हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे.    

रिपोर्ट: सुमित प्रताप सिंह 

Wednesday, January 15, 2014

सृजन से ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन



उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, गाज़ियाबाद शाखा के सहयोग से दिनाँक १२ जनवरी, २०१४ को 'सृजन से' त्रैमासिक पत्रिका व अभिव्यक्ति उन्नयन समिति गाज़ियाबाद के तत्वाधान में एस. एस. के. पब्लिक स्कूल, प्रताप विहार, गाज़ियाबाद (उ. प्र.) में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।



गोष्ठी कि अध्यक्षता कादंबनी के पूर्व सम्पादक डॉ धनञ्जय सिंह जी ने व कार्यक्रम का सफल संचालन गीतकार व 'सृजन से' पत्रिका के एक सशक्त स्तम्भ डॉ जयशंकर शुक्ल किया।


काव्य गोष्ठी में गाज़ियाबाद के कई युवा व वरिष्ठ कवियों ने हिस्सा लिया एवं 'सृजन से' पत्रिका की सम्पादिका मीना पाण्डेय व गोष्ठी के अध्यक्ष डॉ धनञ्जय सिंह ने प्रस्तुति पत्र प्रदान कर सभी कवियों का सम्मानित किया।


Thursday, August 15, 2013

गीतकार सुमित प्रताप सिंह ने कहा गुस्सा छोड़


नई दिल्ली: शोभना वेलफेयर सोसाइटी रजि. के तत्वाधान में दिल्ली एंथम और दामिनी एंथम के लेखक गीतकार सुमित प्रताप सिंह ने भारत के 67 वें स्वतंत्रता दिवस पर रोड रेज को छोड़ने का आग्रह करते हुए अपना नया गाना “एंटी रोड रेज एंथम: गुस्सा छोड़” यू ट्यूब पर रिलीज किया है. रोड रेज ने इन दिनों पूरे विश्व में एक गंभीर समस्या का रूप धारण कर लिया है. छोटी-मोटी बात के लिए लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं. रोड रेज के कारण कई लोग बेमौत मारे गए हैं और कई परिवार तबाह हो चुके हैं. सुमित के अनुसार वह अपने इस गाने से रोड पर चलने वालों को यह संदेश देना चाहते हैं, कि रोड चलने-फिरने के लिए है न कि लड़ाई-झगड़ा करने के लिए. छोटी-मोटी गलती के किसी के साथ मारपीट या किसी को जान से मारना बिल्कुल भी उचित नहीं है. उनकी राय में जब हम किसी को जीवन नहीं दे सकते तो भला किसी की जान लेने का अधिकार हमें कैसे मिल सकता है. सुमित ने उम्मीद जताई है, कि उनके इस गाने को सुनकर व देखकर लोग सड़कों पर झगड़ना छोड़ दें तो उनकी मेहनत सफल मानी जायेगी. इस गाने को स्वर दिया है पंकज सोनी ने, इसकी धुन तैयार की है रविन्द्र सिंह रावत व पंकज सोनी ने तथा इसका वीडियो निर्देशन और एडिटिंग की है संजीव शर्मा ने. विशेष बात यह है कि इस गाने में एक ग्यारह वर्षीय बालक जयंत सक्षम ने गिटार बजाकर इसके संगीत में अपना योगदान दिया है. 
रिपोर्ट: संगीता सिंह तोमर 

Saturday, August 10, 2013

कवि सम्मेलन रहा सफल


नई दिल्ली: दिनाँक 07.08.2013 दिल्ली होम गार्डस आडिटोरिम में दिल्ली पुलिस व पीसमेकर पत्रिका के तत्त्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । इस कवि सम्मेलन के संयोजन की भूमिका निभाई हास्य कवि व कार्टूनिस्ट राजेंद्र कलकल एवं पीसमेकर पत्रिका के प्रबंध संपादक संतोष कुमार 'सरस' ने. वरिष्ठ कवि गजेन्द्र सोलंकी जी के संचालन में कवि सम्मेलन ने आरंभ से अंत तक श्रोताओं को बांधे रखा। इस अवसर पर आमंत्रित कवि व कवियित्री थे आदेश त्यागी, वेद प्रकाश वेद, बलजीत कौर तन्हा, सुमित प्रताप सिंह व चरणजीत चरण। दिल्ली होम गार्ड्स के महानिदेशक आदित्य आर्य के संबोधन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ हुआ। सुमित प्रताप सिंह ने अपनी हास्य कविताओं से कवि सम्मेलन की शुरुआत की. उनकी कविता "अच्छा है बकरापन" श्रोताओं द्वारा विशेष रूप से सराही गई। वेद प्रकाश वेद ने अपनी हास्य कविताओं से सभी को खूब हँसाया। चरण जीत चरण के गीतों ने श्रोताओं का मनोरंजन किया। बलजीत कौर तन्हा ने अपनी सरदारों पर आधारित रचनाओं से वहाँ उपस्थित जनसमूह को गुदगुदाया। राजेंद्र कलकल की हास्य कविताओं ने भी श्रोताओं को खूब हँसाया. उनकी कविता "इमरजेंसी ड्यूटी" विशेष तौर पर सराही गई। आदेश त्यागी के देशभक्ति से परिपूर्ण मुक्तकों व शेरों ने जनता की वाहवाही लूटी। अंत में गजेंद्र सोलंकी की ओजपूर्ण रचनाओं ने वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति के रक्त में उबाल ला दिया। निष्कर्षतः यह कवि सम्मेलन पूर्ण रूप से सफल रहा।

Thursday, June 13, 2013

सुमित को मिला राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड-2013


दिल्ली व दामिनी गान के लेखक, गीतकार व व्यंग्यकार सुमित प्रताप सिंह को एक भव्य सम्मान समारोह में राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड-2013 प्रदान किया गया। सम्मान समारोह का आयोजन दिनाँक 11 जून, 2013 को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली में स्थित कंस्टीट्यूशनल क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे केन्द्रीय कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल व विशिष्ट अतिथि थे असम, उड़ीसा व झारखंड के पूर्व राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी, पूर्व मंत्री बिहार व राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य डॉ. शकील उज़ ज़मन अंसारी एवं वोकहार्ट फाउन्डेशन के चेयरमैन डॉ. हुज़ैफा खोकरीवाला।  इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में अपना सकरात्मक योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। सुमित प्रताप सिंह को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड-2013 देकर सम्मानित किया गया। इस समारोह के संयोजक थे सीनियर जर्नलिस्ट वेलफेयर सोसाइटी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष व सीमापुरी टाइम्स के संपादक राम प्रकाश वर्मा। इस अवसर पर सुमित के माता-पिता, किशोर श्रीवास्तव, हवलदार शास्त्री, पवन चन्दन, देवेंद्र शर्मा, सुरेन्द्र साधक, मोहन कुमार व सागर कुमार इत्यादि विशेष व्यक्ति उपस्थित थे।  

Tuesday, April 30, 2013

सृजन से ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन



    सृजन से त्रैमासिक पत्रिका के तत्वाधान में गत 28 अप्रैल, 2013 साहिबाबाद गाजियाबाद में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।  दोपहर बाद शुरू हुई इस गोष्ठी में दिल्ली एन. सी. आर. के अनेक कवियों ने शिरकत की। गोष्ठी का शुभारम्भ मुख्य अतिथि व वरिष्ठ उपन्यासकार जयप्रकाश डंगवाल व गोष्ठी अध्यक्षता कर रहे गीतकार महेश सक्सैना ने दीप प्रज्जवलित कर किया। देर रात तक चली इस गोष्ठी को उपस्थित कवियों ने अपने सुमधुर कविता पाठ से, उसके चरम तक पहुँचाया । 

       सर्वप्रथम कविता पाठ करते हुए अम्बर जोशी ने ग़ज़ल की मिज़ाज़ पर कलम तेज करते हुए कहा-

"जहन में जब भी खलल हो तो ग़ज़ल होती है
सामने कोई ग़ज़ल हो तो ग़ज़ल होती है 
एक सा वक्त अगर हो तो कहे क्या कोई
वक्त में रद्दोबदल हो तो ग़ज़ल होती है।’’

वर्तमान परिपेक्ष व सत्ता पर तीखा प्रहार कवि, गीतकार मोहन द्विवेदी अपने व्यंग्य मिश्रित अंदाज में इस तरह करते नजर आए -

बची न कौड़ी जेब में, मिला न खोठा दाम। 
दाव चलाती सोनिया, मनमोहन बदनाम।।

महानगर की कुंठा व यंत्रवत जीवन से उदिग्न जयप्रकाश डंगवाल की सशक्त लेखनी कविता का रूप कुछ इस तरह लेती है-

महानगर तेरी बंद कोठरी में ,
ऐसे बीत रहा जीवन ,
जैसे किसी बडी जेल में ,
एक युवा कैदी का यौवन।

पत्रिका की संपादिका व कवियत्री मीना पाण्डे ने भ्रष्टाचार व भ्रष्ट नेताओ को आडे हाथों लेते हुए कहा-

लोकतन्त्र झूठ बना ,
सदन अखाडा है ,
इन सफेद पोशो ने ही ,
देश को बिगाड़ा है।

महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में डॉ. जयशंकर शुक्ल का स्नेह और चाहतो की बात करना सुखद लगता है -

आपकी याद में मन सुमन खिल गया।
याद में मीत का आगमन मिल गया।
चाहतों में हद्य गुनगुनाता रहा। 
देह को स्नेह का आचमन मिल गया।

गीतकार चन्द्रभानु मिश्र समय की विदुप्रताओं की ओर इशारा करते हुए कहते है-

चारों ओर आग की लपटे, मचा हुआ कोहराम जी।
अगर चुप रहे इसी तरह हम, क्या होगा परिणाम जी। 

आधुनिकता व पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर हास्य का पुट लिए दिनेश दुबे ’निर्मल’ की कविता ने खुब गुदगुदाया-

पके हुए सिर के बालों पर काला रंग चढ़ाती है।
झुररी पडे गालों पर मलमल क्रीम लगाती है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष महेश सक्सैना ने अपनी कलम की धार से श्रोताओं कों यूं मंत्र मुग्ध कर दिया-  

इधर जलाना उधर बुझाना,
तुम्हारी हरकत सही नही है,
मेरी वफ़ा को ज़फा बताते, 
तुम्हारी तुहेमत सही नही है। 


बतौर मुख्य अतिथि डंगवाल ने पत्रिका के प्रयासो की सराहना करते हुए कहा कि विगत कई वर्षो से पत्रिका इस तरह की गोष्ठियों का आयोजन समय-समय पर करती आ रही है। अन्त में पत्रिका सृजन से की संपादिका  ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर आमंत्रित कवियों को सम्मानित किया तथा कवियों का आभार व्यक्त करते हुए इस तरह की गोष्ठियों व सृजन से पत्रिका के माध्यम से साहित्य व कला की अनवरत सेवा करते रहने की बात दोहराई। सुमधुर गीत व गज़लों से सराबोर इस गोष्ठी में देर रात तक श्रोताओं को बाँधे रखा। गोष्ठी का कुशल संचालन गीतकार डॉ. जयशंकर शुक्ल ने किया। कार्यक्रम में अवनीश शर्मा, कैलाश पाण्डे , नीता डंगवाल,चंचल सेकिया आदि लोग उपस्थित थे।  

Saturday, April 27, 2013

समाज कल्याण बोर्ड को मिला पुरस्कार



सोलन, हिमाचल प्रदेश। दिनाँक 24 से 26 अप्रैल,2013 को राजभाषा संस्थान, नई दिल्ली द्वारा देव भूमि हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में तीन दिवसीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान राजभाषा संगोष्ठी व कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश भर के सरकारी कार्यालयों के 60 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर हिन्दी विद्वानों सर्वश्री निशिकांत महाजन, डा. महेश गुप्त एवं गोपेश गोस्वामी ने बदलते व्यवसायिक परिवेश में हिन्दी, राजभाषा नीति, संवाद कौशल, तनाव प्रबंधन, हिन्दी कार्यशाला संचालन, कार्यान्वयन प्रक्रिया के अंग तथा वातावरण अनुकूलन आदि विभिन्न विषयों पर अपने रोचक व ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान प्रस्तुत किये। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने भी अपने अमूल्य विचार एवं कलाओं का प्रदर्शन किया। 
      इस अवसर पर केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव द्वारा राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक विसंगतियों व सद्भाव पर केंद्रित स्वनिर्मित जन चेतना कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी ‘खरी-खरी’’ का प्रदर्शन भी किया गया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सरकारी कार्यालयों को उनकी राजभाषा हिन्दी की उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिये सम्मानित भी किया गया। जिसमें केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड का नाम विशेष उल्लेखनीय है। बोर्ड की ओर से संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव एवं हिंदी अधिकारी श्रीमती ज्योति सिंह ने स्मृति चिन्ह प्राप्त किया।  
रिपोर्ट: संगीता सिंह तोमर 

Thursday, April 4, 2013

कीर्ति राणा हुए पत्रकारिता के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित


इंदौर, मध्य प्रदेश: इंदौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित सार्क देशों के भाषाई पत्रकारिता सम्मलेन में इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार-भोपाल दबंग दुनिया के सम्पादक कीर्ति राणा को उनकी दीर्घ पत्रकारिता के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि मप्र के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता सहित अन्य अतिथियों से स्मृति चिन्ह गृहण करते श्री राणा और श्रीमती राज कुमारी राणा। उल्लेखनीय है, कि श्री राणा दैनिक भास्कर में अट्ठाईस वर्षों की सेवा के दौरान इंदौर में चीफ रिपोर्टर के साथ ही उज्जैन ब्यूरो चीफ, राजस्थान के उदयपुर और श्रीगंगानगर त्तथा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सम्पादक रह चुके है। २०११ में इंदौर से शुरू हुए दैनिक दबंग दुनिया से जुड़े और नवम्बर १२ से भोपाल में दबंग दुमिया को स्थापित करने में जुटे हैं। सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों से जुडा स्तम्भ "पचमेल" वर्षों से लिख रहे हैं, इसके साथ ही सिटी रिपोर्टिंग आधारित पुस्तक प्रकाशन को तैयार है। इसके साथ ही काव्य संग्रह भी शीघ्र प्रकाशित होना है। 

सादर ब्लॉगस्ते की ओर से कीर्ति राणा जी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ।

Tuesday, April 2, 2013

सुमित को दामिनी एंथम के लिए मिला झलकारी बाई सम्मान-2012


नई दिल्ली: दिल्ली रेप कांड पीड़िता को श्रद्धांजलि देने हेतु सुमित प्रताप सिंह द्वारा बनाये गये दामिनी एंथम को दिल्ली की गैरसरकारी संस्था सक्षम संकल्प सेवा सोसाइटी द्वारा रविवार दिनांक  31.03.13 को झलकारी बाई सम्मान-2012 से सम्मानित किया गया. दिल्ली में स्थित सांवल नगर में सोसाइटी ने एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया था, जिसका विषय था, "कन्या भ्रूण हत्या व महिलाओं के विरुद्ध अपराध". इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक, स्थानीय निगम पार्षद, दिल्ली पुलिस महिला अपराध शाखा से इंस्पेक्टर शशि कौशिक, सोसाइटी के संरक्षक मोहसिन किदवई, अध्यक्ष कृष्ण कोली, उपाध्यक्ष पद्मा रानी इत्यादि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. इस अवसर पर सभी ने अपने-अपने विचार रखे. सुमित प्रताप सिंह ने महिला शोषण पर अपना वक्तव्य दिया व दामिनी एंथम को गाकर सुनाया. दामिनी एंथम को सुनकर वहाँ उपस्थित जनसमूह की आँखें नम हो गयीं. सक्षम संकल्प सेवा सोसाइटी के सचिव लखमी चंद ने सभी अपनी सोसाइटी के उद्देश्य व कार्यों से सभी को परिचित करवाया तथा सोसाइटी के सभी सदस्यों के साथ ऐसे ही जन जागरूकता कार्यों को निरंतर करते रहने का संकल्प लिया. 

किशोर श्रीवास्तव को मिला सम्मान


बिजनौर। यहां धरोहर स्मृति न्यास, बिजनौर द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट उपलब्धिधारक प्रतिभाओं को अनेक नामित पुरस्कारों से अलंकृत किया गया। इसमें हम सब साथ साथ के सदस्य सर्वश्री प्रो. (डा.) रवि शर्मा एवं हम सब साथ साथ के कार्यकारी संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव को भी क्रमशः रणवीर सिंह स्मृति व्यंग्य एवं बाबू सिंह चौहान स्मृति साम्प्रदायिक सद्भावना पुरस्कार से अलंकृत किया गया। पुरस्कार स्वरूप प्रतिभाओं को स्मृति चिन्ह, श्रीफल, प्रमाण पत्र एवं नकद राशि देकर व शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर किशोर श्रीवास्तव की 27वें वर्ष में चल रही जन चेतना कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी ‘खरी-खरी’ का आयोजन भी किया गया।

Monday, March 25, 2013

लाल कला मंच का रंग अबीर उत्सव एवं सम्मान समारोह-2013 संपन्न



नई दिल्लीःलाल कला,सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच(रजि.) द्वारा सामाजिक भाईचारे के पावन पर्व होली के शुभ अवसर पर  रंग अबीर उत्सव-2013(काव्य गोष्टी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम) का आयोजन अल्फा शैक्षणिक संस्थान, मीठापुर के प्रांगण में वरिष्ठ सामाजसेवी मास्टर डंबर सिंह की  अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का शुभारंभ लाल बिहारी लाल के सरस्वती वंदना-ऐसा माँ वर दे/विद्या के संग-संग/सुख समृद्धि से सबको भर दे, से हुआ। कार्यक्रम के अतिथि कामरेड जगदीश चंद्र शर्मा, मीठापुर के पूर्व निगम पार्षद महेश आवाना, समाजवादी आत्मा राम पांचाल तथा गौरव बिन्दल थे। इस कार्यक्रम का संयोजन दिल्ली रत्न श्री लाल बिहारी लाल का था तथा संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डा. ए. कीर्तिवर्धन ने किया। इस अवसर पर कवियों एवं बच्चों को संस्था द्वारा काव्यसेवी सम्मान अतिथियों द्वारा एवं अतिथियों को डा. आर कान्त एवं डा.के.के. तिवारी द्वारा समाजसेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरुप अंग वस्त्र एवं सम्मान-पत्र प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम में स्थानीय विभिन्न स्कूलों के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं दर्जनों
कवियों ने भी भाग लिया। जिसमें मुख्यतः थे - राकेश महतो, रवि शंकर, कृपा शंकर व दिनेश चन्द्र पाण्डेय। 


लाल बिहारी लाल ने इस अवसर पर निम्न पंक्तियों से होली पर एकता का सन्देश दिया:- 
 
होली को दोस्तो हम सब मनायें मिलजुल संग।
  जतन करेंगे तो बिखरेंगे भारत में ख़ुशी के रंग।।

इनके आलावा डा.ए.कीर्तिबर्धन, सुश्री शिवरंजनी, श्री के.पी. सिंह, श्री राकेश कन्नौजी, डा. सी.एन.शर्मा, श्री हवलदाऱ शास्त्री, ब्रजवासी तिवारी मा.डंबर सिंह तनवर आदि ने भी अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये। इस अवसर पर तुलसी शर्मा, मुरारी कुमार, महेश सिंगला, मलखान सैफी, श्रीमती शारदा गुप्ता,श्री मनोज गुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित होकर इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे थे। अन्त में संस्था की अध्यक्षा श्रीमती सोनू गुप्ता ने  लाल कला मंच की ओर से कार्यक्रम में पधारे कवियों, अतिथियों एवं विभिन्न स्कूल से आये हुए बच्चों को धन्यवाद  दिया।                                                            


Friday, November 30, 2012

शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' की कृति "दुमदार दोहे" को मिला सम्मान

    बलपुर की साहित्यिक-सामाजिक एवं सामाजिक संस्था कादम्बरी द्वारा शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' जी की कृति "दुमदार दोहे (दोहा संग्रह)" को दिनाँक २७ नवंबर, २०१२ को हितकारिणी नर्सिंग कॉलेज, विक्टोरिया अस्पताल के सामने, जबलपुर में शाम ५.३० बजे आयोजित सम्मान में "स्व. गोंटिया विजय शंकर उपाध्याय सम्मान" से सम्मानित किया गया. शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' जी को उक्त सम्मान के साथ-साथ २१००/- रुपये भी सम्मान राशि के रूप में प्रदान किये गए. 


सादर ब्लॉगस्ते परिवार की ओर से शिवानन्द सिंह 'सहयोगी' जी को बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ.

सहयोगी जी के दुमदार दोहे पढ़ें : -




Thursday, October 25, 2012

लक्ष्मी शंकर वाजपेयी को मिला साहित्य परिमल सम्मान



चित्र फोटोग्राफर हरीश कुमार से साभार 
दिल्ली:  20, अक्टूबर, 2012 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित सम्मान समारोह में गैमट फ़ाउण्डेशन द्वारा श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी को साहित्य परिमल सम्मान 2011-12 से सम्मानित किया गया । फ़ाउण्डेशन द्वारा वाजपेयी जी को सम्मान के प्रतीक रूप में शाल, श्रीफल,  सम्मान पत्र व सम्मान राशि के रूप में 51000/- रूपये भी प्रदान किये गये । उन्होंने सम्मान राशि को सहर्ष गैमट फ़ाउण्डेशन को ही वापस कर दिया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री  योगानंद शास्त्री थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता की उत्तर प्रदेश के हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष व वरिष्ठ कवि श्री उदय प्रताप सिंह ने । सम्मान समारोह कार्यक्रम का संचालन किया सुश्री सरला माहेश्वरी ने सम्मान समारोह एवं योगानंद शास्त्री जी के लंबे से भाषण के उपरांत एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका संचालन श्री  धनंजय सिंह ने किया । कवि सम्मेलन में सर्वश्री उदय प्रताप सिंह, बाल स्वरूप राही, किशन सरोज, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, ब्रज किशोर, डॉ.अश्वघोष, विजय पाल सिंह, अरुण भारती तथा सुश्री ममता किरण इत्यादि कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया । ममता किरण जी की कविता "स्त्री और नदी" को जहाँ खूब तालियाँ मिलीं वहीं लक्ष्मी शंकर वाजपेयी जी के फेसबुक व सामाजिक संबंध पर आधारित दोहे व गजलों ने दर्शकों की वाहवाही बटोरी ।  इस प्रकार गैमट फ़ाउण्डेशन के अध्यक्ष श्री दुष्यंत कुमार के संयोजन में सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन का आयोजन सफल रहा । 

सादर ब्लॉगस्ते से रपटकार संगीता सिंह तोमर  

Sunday, July 1, 2012

सुमित प्रताप सिंह हुए आर्य रत्न से सम्मानित




   श्री निवासपुरी,दिल्ली में दिनाँक- 30.06.2012 को आयोजित एक कार्यक्रम में युवा कवि, लघुकथाकार, व्यंग्यकार व दिल्ली गान के लेखक सुमित प्रताप सिंह को आर्य ट्रस्ट ने आर्य रत्न सम्मान-2012 से सम्मानित किया. इस अवसर पर सुमित प्रताप सिंह ने अपनी व्यंग्य रचनाओं का पाठ किया व दिल्ली गान सुनाकर वहाँ उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया. आर्य ट्रस्ट के चेयरमैन व ट्रस्टी वेद प्रकाश शास्त्री ने सुमित प्रताप सिंह को दिल्ली  की विशेषताएं समेटे हुए दिल्ली गान लिखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद दिया.उन्होंने कहा कि दिल्ली गान को सुनने के बाद उन्हें यह अहसास होता है कि वह इतने सुंदर शहर में रह रहे है. उन्होंने सुमित प्रताप सिंह को ऐसी ही शानदार रचनायें लिखते रहने के लिए शुभकामनायें दी. इस अवसर पर बी.के.सिंह, गोपी कान्त डे, प्रेम चंद कुकरेजा, विवेक झा, प्रवीन झा, विपिन छाबड़ा, बॉबी कुमार व अन्य लोग उपस्थित थे.
दैनिक समाचार पत्र भेदी नज़र, सोमवार, 2 जुलाई, 2012

Tuesday, June 5, 2012

सुमित प्रताप सिंह को मिला शब्द साधक सम्मान


बायें से श्री सुमित प्रताप सिंह, डॉ. हरीश अरोड़ा, श्री हवलदार सिंह शास्त्री एवं  आचार्य श्री कृष्णानंद वर्मा 

नई दिल्लीः लाल कला,सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच (रजि.) द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्व में बिगडते हुए पर्यावरण के संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर एक चर्चा एवं काव्य गोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन अल्फा शैक्षणिक संस्थान स्कूल रोड, मीठापुर में किया गया। जिसमें  वक्ता के रुप में डा. हरीश अरोडा प्रो. सान्ध्य डी.ए.वी. कालेज श्री निवासपुरी, नई दिल्ली एवं बल्लवगढ कालेज के पूर्व प्रो.(आचार्य) हवलदार सिंह शास्त्री ने भाग लिया।
पर्यावरण पर आधारित रचनाओं का काव्य पाठ भी किया गया, जिसमें भाग लेने वाले कवि थे-डा.ए.कीर्तिवर्धनश्री प्रदीप गर्ग पराग, पर्यावरणप्रेमी लाल बिहारी लाल, श्री प्रकाश लखानी,श्री एल.एन.गोसाई, श्री दीपक शर्मा कुल्लवी, श्री शिव कुमार ओझा, श्री शिव कुमार प्रेमी, सुश्री महिमा श्री, मो. अब्दुल रहमान, श्री सुरेन्द्र साधक, श्रीमती रेखा रानी, श्री वीरेन्द्र  क़मर, श्री भुवनेश सिंघल, श्री भवानी शंकर शुक्ल इत्यादि। इसके अतिरिक्त श्री अर्श अमृतसरी के गज़ल संग्रह ज़िंदगी गज़ल है तथा लाल बिहारी लाल सहित अन्य दस कवियों की रचनाओं पर आधारित काव्य संग्रह “बस इसी एक आस में” का भी लोकार्पण किया गया।

इस कार्यक्रम के विशेष आकर्षण थे दिल्ली गान के रचयिता श्री सुमित प्रताप सिंह जिन्होंने दिल्ली गान को सुना कर वहाँ उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया  डॉ. हरीश अरोड़ा की गज़ल "बेटियाँ" को भी खूब वाहवाही मिली। इस अवसर पर सुमित प्रताप सिंह को लाल कला, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच (रजि.) ने उनके द्वारा साहित्य सृजन में योगदान देने हेतु विशेष रूप से “शब्द साधक सम्मान” से सम्मानित किया। श्रीमति ममता श्रीवास्तव एवं श्री मोहन कुमार को भी क्रमशः सुर साधक सम्मान व स्वास्थ्य श्री सम्मान प्रदान किये गए। इस कार्यक्रम का संयोजन श्री लाल बिहारी लाल, अध्यक्षता आचार्य श्री कृष्णानन्द वर्मा तथा संचालन डा. कीर्तिवर्धन ने किया।

Tuesday, May 1, 2012

साहित्यकार "सहयोगी" जी की पुस्तकों का लोकार्पण



     साहित्यकार शिवानन्द सिंह "सहयोगी" की पुस्तकों "घर-मुंडेर की सोनचिरैया" एवं “दुमदार दोहे” का लोकार्पण चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स एवं इंडस्ट्री,मेरठ के सभागार में सम्पन्न हुआ.
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ.वेदप्रकाश अमिताभवरिष्ठ साहित्यकार एवं संपादक "अभिनव प्रसंगवश" थे. समारोह की अध्यक्षता डॉ.सुरेश उजाला,संपादक उत्तर प्रदेश ने की.
इस समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. कमल सिंह (सुप्रसिद्ध भाषाविद,अलीगढ)श्री किशन स्वरूप (नामवर गजलकार मेरठ) एवं श्री शमीम अख्तर (वरिष्ठ महाप्रबंधक,दूरसंचार,मेरठ) रहे.
पुस्तकों के लोकार्पण के उपरान्त अपने संबोधन  में मुख्य अतिथि डॉ.वेदप्रकाश अमिताभ ने कहा “श्री शिवानंद सहयोगी के गीत गहरी संवेदनशीलता से समृद्ध हैं. उनका एक सुनिश्चित विजन भी है. गीत को कोमल विधा कहा जाता है और उसके खुदरे यथार्थ की अभिव्यक्ति के योग्य नहीं माना जाता, लेकिन श्री सहयोगी के गीत अपने परिवेश को प्रमाणिकता के साथ अभिव्यक्त करने में सक्षम है.”
समारोह अध्यक्ष डॉ. सुरेश उजाला ने अपने उद्बोधन में कहा- “आंचलिकता के माधुर्य से ओतप्रोत सहयोगी जी के गीत मानव-मन की सुंदर अभिव्यक्ति करते हैं. वर्तमान समय की विसंगतियों से त्रस्त जीवन को सहजता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं. गाँव की मिट्टी की महक भी लोकार्पित पुस्तकों में सहज ही महसूस की जा सकती है. इसके लिए लेखक बधाई के पात्र हैं.”
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ.कमल सिंह ने कहा- “लोकार्पित पुस्तक ‘दुमदार दोहे’ में देखेंगे कि अनकही बात कहने के लिए, कभी दोहे में उठाये गये प्रश्न के उत्तर के लिए, कभी किसी अतिरिक्त व्यंजना के लिए, कभी दोहे की किसी समस्या के समाधान के लिए तो कभी समस्या की पूर्ति के लिए इन दोहों में दुम लगाई गई है. निश्चित रूप से सहयोगी जी के इन दोहों में पाठकों को एक  अदभुत आनंद की प्राप्ति हो सकेगी.”
इस अवसर पर साहित्यकार शिवानन्द सिंह "सहयोगी" ने अपने संबोधन में कहा- “दोहा कभी चरण बदल कर सोरठा बन जाता है, तो कभी रोला के मेल से कुण्डलिया बन जाता है. कभी चौपाइयों के बीच में आकर अपनी बात कहने लगता है. दोहे की इन्ही अनकही बातों को कहने के लिए उन्होंने इसे पूर्णता देने की कोशिश की है.” कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्री कान्त शुक्ल ने किया. समारोह में स्थानीय साहित्यकारों के साथ निकटवर्ती जनपदों-दूरदराज के साहित्यकारों ने सहभागिता की. इनमें उल्लेखनीय हैं- डॉ.बी.के.मिश्रा, नेमपाल प्रजापति, सविता गजल, रामकुमार गौड, शिवकुमार शुक्ला, अमित धर्म सिंह, डॉ.असलम जमशेदपुरी, डॉ. विशम्भर पांडे, ओमकार गुलशन, डॉ.प्रदीप जैन, आलोक पंडित, नवेन्दु सिंह, रामशरण शर्मा, डॉ ए.के. चौबे आदि उल्लेखनीय है.

संगीता सिंह तोमर
ई-1/4, डिफेन्स कालोनी पुलिस फ्लैट्स,
नई दिल्ली- 110049