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Friday, June 19, 2015

हिन्दी को भारतीय संसद की प्रमुख भाषा का दर्जा मिले – तेजेन्द्र शर्मा


लन्दन:वरिष्ठ कथाकार एवं कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा का कहना है कि हिन्दी भारत में अनुवाद की भाषा है। भारत की संसद एवं सरकारी महक़मों में सारा काम काज अंग्रेज़ी भाषा में किया जाता है और उस सारे काम का अनुवाद हिन्दी में करवा कर गोदामों को भरने के काम में लाया जाता है। हम आज यह प्रस्ताव पारित करते हैं कि भारतीय संसद में हिन्दी को प्रमुख भाषा का दर्जा मिले और हिन्दी भाषा में पूरी कार्यवाही का लेखा जोखा रखा जाए। यदि कुछ सांसदों को उसके अंग्रेज़ी अनुवाद की आवश्यक्ता हो तो उन्हें उपलब्ध करवा दिया जाए। अवसर था 15 जून 2015 को विश्व हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में, कथा यू के, के सहयोग से क्रॉयडन हिल्टन, लंदन में आयोजित एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं संस्कृति सम्मलेन
सम्मेलन का उद्घाटन भारतीय उच्चायोग के मन्त्री समन्वय श्री सुखदेव सिंह सिद्धु ने मुख्य अतिथि के तौर पर किया। उन्होंने इस प्रयास का स्वागत किया कि भारत से हिन्दी प्रेमी ब्रिटेन में कथा यू.के. के साथ मिल कर हिन्दी भाषा एवं साहित्य के विकास के लिये सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं।
अपने स्वागत भाषण में लेबर पार्टी की काउंसलर एवं वरिष्ठ कथाकार श्रीमती ज़किया ज़ुबैरी ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से ब्रिटेन एवं भारत के हिन्दी प्रेमियों को आपस में बातचीत करने का अवसर मिलेगा। इस सत्र के अध्यक्ष थे श्री अमर सिंह राठौड़। इस सत्र में पुरवाई, आधुनिक साहित्य, प्रवासी संसार एवं उर्वशी जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के अतिरिक्त बहुत सी पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात भाषा और लिपि व हिन्दी – कारोबार एवं तकनीक की भाषा पर होने वाले दोनों सत्रों को मिला कर एक कर दिया गया। इस सत्र की अध्यक्षता ओसमानिया विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शीला मिश्रा ने की तो मुख्य अतिथि रहीं ब्रिटेन की वरिष्ठ कथाकार उषा राजे सक्सेना। मंच पर ब्रिटेन से डॉ. अरुणा अजितसरिया एवं शिखा वार्ष्णेय भी मौजूद थीं। वक्तव्य सैद्धान्तिक थे तो व्यवहारिक भी। इस सत्र में ब्रिटेन के साहित्यकारों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। सत्र का संचालन भोपाल के कथाकार, संपादक एवं प्राध्यापक डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम का गरमागरम सत्र रहा प्रवासी साहित्य पर जिसके मुख्य अतिथि रहे प्रवासी संसार के संपादक राकेश पाण्डेय जबकि अध्यक्षता एवं संचालन किया कथाकार एवं पुरवाई के नये संपादक तेजेन्द्र शर्मा ने। इस सत्र में शैल अग्रवाल (बरमिंघम), जय वर्मा (नॉटिंघम) एवं महेन्द्र दवेसर (लन्दन) ने महत्वपूर्ण विचार रखे। आशिष कंधवे का कहना था कि वह किसी प्रवासी अप्रवासी को नहीं मानते। हिंदी में लिखने वाला हिंदी का लेखक है फिर वह कहीं भी हो. हिंदी हम सबकी है. भाषा भेदभाव नहीं करती। वहीं तेजेन्द्र शर्मा का कहना था कि विदेशों में लिख रहे साहित्यकार एक विचित्र किस्म की दुविधा का शिकार हैं। वे अपने आपको प्रवासी साहित्यकार मानना भी नहीं चाहते मगर विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में एक प्रवासी लेखक के तौर पर अपनी रचनाएं शामिल भी करवाना चाहते हैं। उन्होंने भारतवासियों को चेतावनी भी दी कि भारतवंशियों (यानि कि प्रवासियों) का लेखन तभी निरंतर चलता रह सकता है यदि भारत से आ रहे नये प्रवासी हिन्दी भाषा के प्रति स्नेहाभाव रखते होंगे। जिस तरह का कच्चा माल भारतवासी हमें सप्लाई करेंगे उसी कच्चे माल पर निर्भर होगा कि भारतवंशियों का लेखन क़ायम रह सकता है या नहीं।
तत्पश्चात सुश्री ममता अहार ने एकल नृत्य नाटिका मीराबाई प्रस्तुत की। जिसकी भरपूर सराहना की गयी। डॉ. ममता सिंह ने अपने चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई थी जबकि हिन्दी साहित्यकारों पर जारी की गई डाक टिकटों की भी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।
कार्यक्रम का अन्तिम सत्र था कवि सम्मेलन एवं नृत्य नाटिका। कवि सम्मेलन का संचालन ग़ज़लकार सुशील ठाकुर ने किया। इस कवि सम्मेलन में भारत से श्री उदयवीर सिंह, श्री कुमेश कुमार जैन, आशिष कंधवे, सुषमा भण्डारी, डॉ. ममता सिंह, राकेश पाण्डेय, आभा चौधरी, रेणु पन्त, नीलम राठी, अलका मोहन आदि शामिल थे तो ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व सोहन राही, ज़किया ज़ुबैरी, उषा राजे सक्सेना, शैल अग्रवाल, उर्मिल भारद्वाज, इंदिरा आनन्द, शिखा वार्ष्णेय, अनुपमा कुमारज्योति एवं तेजेन्द्र शर्मा।
अन्त में प्रतिभागियों को काउंसलर ज़किया ज़ुबैरी, श्री अमर सिंह राठौर एवं तेजेन्द्र शर्मा ने अलंकरण एवं सम्मानपत्र भेण्ट किये।
रिपोर्ट -अनुपमा कुमार ज्योति 

Friday, February 28, 2014

व्यं‍ग्यस्ते का हुआ इटावा में लोकार्पण

इटावा, उ.प्र.- नगर में मोतीझील स्थित सरस्वती शि‍शु मंदि‍र वि‍द्यालय में बुधवार दिनाँक 26 फरवरी, 2014 को आयोजि‍त कार्यक्रम के दौरान व्यं‍ग्य विधा पर आधारि‍त पुस्तक “व्यं‍ग्यस्ते” का लोकार्पण कि‍या गया। पुस्तक के लेखक दि‍ल्ली‍ एंथम, दामि‍नी एंथम व इटावा एंथम के रचयि‍ता सुमि‍त प्रताप सिंह हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अति‍थि‍ डा. दि‍नेश पालीवाल ने कहा कि‍ जो वक़्त से खबरदार नहीं है, वह चाहे कुछ भी हो रचनाकार नहीं। साथ ही कहा कि‍  सोचना यह है कि‍ वक़्त हमें लि‍खने के लि‍ए मजबूर क्यों करता है। डा.शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि‍ लेखक और शि‍‍क्षा देश की दशा और दि‍शा बदलने में सक्षम हैं और कि‍ताबों के जरि‍ए इति‍हास और वि‍चारों को बदला जा सकता है। सदैव व्यक्ति को तकनीक के साथ चलना चाहि‍ए। पुस्तकों के माध्यम से प्रचार-प्रसार का तरीका पुरातनकाल से अभी तक चला आ रहा है और इसकी उपादेयता एवं प्रासंगि‍ता कम नहीं हुई है। वि‍चारों को जनमानस में पहुंचाने के कार्य में पुस्तकें अत्यंत उपयोगी माध्यम हैं। 
वि‍द्यालय प्रबंधक श्रीकृष्ण वर्मा ने व्यंग्यस्ते पुस्तक के लेखक सुमि‍त प्रताप की सराहना करते हुए कहा कि‍ इटावा कवि‍ ‘देव’ और ‘गंग’ की भूमि‍ है और इस वि‍धा को आगे बढ़ाने का जो कार्य इटावा में जन्मे सुमि‍त प्रताप ने कि‍या है, उससे लगता है कि‍ इनके ऊपर माँ सरस्वती की कृपा है। उन्होंने आगे कहा कि‍ भले ही बड़ी- बड़ी डि‍ग्रि‍यां मि‍ल जायें, लेकि‍न मां सरस्वती का वरदहस्त सुमि‍त जैसे लोगों को ही मि‍लता है। अध्य‍क्षता करते हुए श्रीकालीबाड़ी मंदि‍र के महंत शि‍वानंद ने कहा कि‍ सुमि‍त देश ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्‍ट्रीय फलक पर चमकें। साथ ही कहा कि‍ इटावा ऐसी भूमि‍ है इस पर कि‍या गया हर कार्य सि‍द्ध और सफल होता है। सुमि‍त प्रताप ने अपने  विचार रखते हुए कहा कि‍ व्यंग्यस्ते में पत्र शैली में कुल 42 व्यंग्य संकलित हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम में घोषणा की कि जब भी उनकी नई पुस्तक प्रकाशित होगी, तो वह उसका लोकार्पण इटावा में भी किया करेंगे।
इस लोकार्पण कार्यकम के दौरान डा. आशीष दीक्षि‍त, आशीष वाजपेई, वि‍वेक रंजन गुप्ता, आशुतोष त्रिवेदी, अवनीन्द्र जादौन, राजेश जादौन के अलावा वि‍द्यालय परि‍वार की ओर से शि‍क्षकगण भी मौजूद रहे।

Wednesday, February 26, 2014

सेवा भारती भजन प्रतियोगिता

7 फरवरी शुक्रवार का दिन निश्चित हुआ था ....दिल्ली प्रान्त में सेवा भारती की सभी मंडलियों की अंतिम भजन प्रतियोगिता का |
आज की प्रतियोगिता झंडेवालान मंदिर में होनी थी ...वहाँ पहुँचने का समय था 1 बजे ...
हमने उत्तम नगर से मेट्रो ली वहीँ पूरी मंडली से मुलाकात हो गई ,झंडेवालान मेट्रो स्टेशन पहुंचकर अगर आप पैदल जाना चाहते हैं तो आप 15 मिनट में पहुँच जायेंगे नहीं तो आप बैटरी रिक्शा लेकर पहुँच सकते हैं | हम 1.25 पर मंदिर में पहुँच गए थे कुछ मंडलियाँ आ चुकी थी कुछ अभी आ रही थी | एक कार्यकर्ता भजन गा रही थी क्योंकि अभी प्रतियोगिता शुरू होने में थोड़ा समय था इसलिए कुछ बहनों द्वारा भजन बोले जा रहे थे |
लगभग 2 बजे भजन प्रतियोगिता शुरू हुई क्योंकि तीनों जज आ चुके थे उनमें एक श्रीमती रेनू पाठक थीं जो कि अखिल भारतीय सेवा भारती का कार्यभार संभालती हैं बाकी दो जज दिल्ली के ही थे |
कुल 12 मण्डलियो की प्रतियोगिता थी ,हर विभाग से दो दो चयनित मंडलियाँ वहाँ पधारी थीं .....
दिल्ली प्रान्त के छह विभाग निम्नलिखित हैं .....
1.झंडेवालान विभाग 
2.यमुना विहार विभाग 
3.पूर्वी विभाग 
4.पश्चिमी विभाग
5.उत्तरी विभाग 
6.दक्षिणी विभाग 
सभी मंडलियाँ अपनी एक जैसी ड्रेस में सजी हुई ...पंक्तिओं में बैठी थीं ......
झंडेवालान मंदिर के सामने ही सेवाभारती की झंडेवालान शाखा का कार्यलय है |झंडेवालान मंदिर में रात को कोई जागरण होना था इसलिए काफी ऊँची स्टेज बनाई गई थी जिसका इस्तेमाल करने के लिए सेवाभारती को अनुमति मिल गई थी ... दोनों साइड में कुर्सियां रखी गई थी जिसपर निरिक्षिकाएं ,अतिथिगण एवं महिला मंडल के सदस्य विराजमान थे | 
सबसे पहले दीप प्रज्वलित किया गया कुछ मुख्य अतिथिओं द्वारा फिर शुरू हुआ रंगारंग कार्यक्रम ......
सब मंडलियो ने बारी बारी एक एक भजन गाया बहुत ही शालीनता के साथ एक मंडली इंतज़ार में खड़ी रहती तब तक उन सब को मंदिर की तरफ से भेट स्वरुप माता के आशीर्वाद के रूप में एक एक चुन्नी दी जाती और एक मंडली अपना भजन प्रस्तुत करती | इसी तरह बारी बारी भजन प्रस्तुत हो रहे थे जिसे सुनते सुनते 3.30 हो चुके थे | .....
उसके बाद तीनों जज अपना परिणाम तैयार करने में लग गए ,तब तक कुछ बहनों ने भजन गाए | रेणुका पाठक जी ने सभी बहनों को कुछ चुनाव प्रक्रिया के बारे में बताया और अपना वोट बनवाने की प्रक्रिया समझाई | तब तक परिणाम तैयार हो चुका था .....
परिणाम रेनू पाठक जी द्वारा घोषित किया गया जिसमें प्रथम और तृतीय स्थान झंडेवालान विभाग को मिला और द्वितीय स्थान यमुना विहार विभाग को मिला | प्रथम स्थान वालों को एक एक बड़ी कडाही ,द्वितीय स्थान वालों को एक एक साड़ी और तृतीय स्थान वालों को स्टील के डिब्बे दिए गए बाकी के सभी प्रतिभागीओं को एक एक चूड़ियाँ रखने का डिब्बा मिला | 
इसके बाद बाकी श्रदालुओं से अलग दो पंक्तिओं में ले जाकर सभी को मंदिर में दर्शन कराये गए ...उसके बाद हलवा चने और चाय वगेरह दी गई ...जिसके बाद सब अपने अपने गंतव्य की तरफ चल पड़े |
वहाँ की कुछ तस्वीरें आप तक पहुँचाती हूँ.....











                                        रिपोर्टर :--- सरिता भाटिया 

Friday, February 21, 2014

कोई मैं झूठ बोलया का लोकार्पण

दिल्ली का प्रगति मैदान इस समय लेखकों का अखाड़ा बन रखा है. जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले की. यहाँ रोज नई-नई पुस्तकें लोकार्पित होकर पाठक गणों तक पहुँच रही हैं. इसी क्रम में प्रसिद्द वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं व्यंग्य विधा को समर्पित प्रसिद्द पत्रिका "व्यंग्य यात्रा" के संपादक प्रेम जनमेजय की नई पुस्तक “कोई मैं झूठ बोलया" का लोकार्पण दिनाँक 19.02.14 को लेखक मंच पर किया गया.  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ व्यंग्यकार नरेंद्र कोहली ने तथा वक्ता के रूप में उपस्थित थे वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रदीप पन्त, सुभाष चंदर एवं कहानीकार सूरज प्रकाश तथा संचालन किया कौशलेन्द्र प्रपन्न ने. इस कार्यक्रम में पदम श्री अशोक चक्रधर ने अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज की व अपने वक्तव्य से प्रेम जनमेजय को उनकी नई पुस्तक हेतु शुभकामनाएँ अर्पित कीं. इस अवसर पर प्रेम जनमेजय ने इसी पुस्तक में संकलित व्यंग्य बेशर्ममेव जयते का पाठ किया, जिसे वहाँ उपस्थित जनसमूह ने काफी सराहा. इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक लालित्य ललित, लेखिका सरिता भाटिया, युवा हिन्दी लेखिका संगीता सिंह तोमर एवं अन्य व्यंग्य प्रेमी उपस्थित थे.


Tuesday, January 28, 2014

ज़किया ज़ुबैरी के कहानी संग्रह साँकल का विमोचन


शुक्रवार दिनाँक 24 जनवरी, 2014 को इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी में लन्दन, ब्रिटेन में रहनेवाली लेखिका ज़किया ज़ुबैरी के कहानी संग्रह साँकल का लोकार्पण किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे चर्चित व्यंग्यकार व व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय. कार्यक्रम की अध्यक्षता की प्रो. गंगा प्रसाद ने. संयोजक की भूमिका में लंदनवासी कहानीकार तेंजेद्र शर्मा थे व इस कार्यक्रम के संचालन की बागडोर संभाली कथाकार अजय नावरिया ने. 


कार्यक्रम का शुभारंभ तेजेन्द्र शर्मा ने ज़किया के कहानी संग्रह पर बीज वक्तव्य देकर किया. उन्होंने ज़किया की विभिन्न कहानियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की व बताया कि गंगा-जमुनी तहजीब की भाषा में लिखी गईं उनकी कहानियों में मानवीय रिश्तों एवं समस्याओं के साथ राजनीतिक उठा-पटक की झलक भी मिलती है. इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे. 

जहाँ अध्यक्ष महोदय ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मान्य हुई हिन्दी की शिखरवर्ती कहानियों को प्रवासी एवं गैर प्रवासी खेमे में बाँटने की जरूरत नहीं है. हिन्दी में अच्छी कहानियाँ कहीं भी और कभी भी लिखी जा सकती हैं, वहीं मुख्य अतिथि ने कहा कि प्रवासी लेखन में मूल देश से दूर होने और वहाँ की यादों के अलावा अब अपनाए गए मुल्क की समस्याओं का वर्णन भी आने लगा है. प्रवासी लेखक आज जिस प्रकार की समस्याओं का सामना परदेश में रहकर महसूस कर रहे हैं, वैसी समस्याएं अब अपने देश भारत में भी उत्पन्न होने लगीं हैं, क्योंकि जीवन मूल्यों में हुए क्षरण पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएँ अब हर देश की समस्या बन चुकी हैं. 


ज़किया की कहानियों पर डॉ. अल्पना मिश्र व प्रो. सत्यकेतु ने भी अपने सुंदर विचार रखे. 


इसी कार्यक्रम के दौरान ज़किया ज़ुबैरी ने अपनी रचना प्रक्रिया के विषय में बताते हुए कहा कि उनका लिखना पहले से तय नहीं होता. उन्होंने बताया कि वो पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से वक़्त निकालकर कहानियाँ लिखती हैं. उन्होंने मासूमियत से स्वीकार किया कि उन्हें नहीं मालूम कि उनकी कहानियों में क्या खूबियाँ हैं, लेकिन उनकी कहानियों के कथानक व किरदार सच्चे हैं. इस दौरान उनके द्वारा बताई गई बचपन में शिव भगवान की काँच की कलाकृति बेचकर अपना जेब खर्च निकालने की बात से उनके बचपन से ही आत्मनिर्भर व स्वाभिमानी होने की उनकी एक अन्य खूबी का भी पता चला.

इस प्रकार अजय नावरिया के सफल संचालन में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस अवसर पर राजकमल से अशोक माहेश्वरी, कवियित्री ममता किरण, वरिष्ठ कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडे, राजीव तनेजा, वंदना गुप्ता, विवेक मिश्रा, नमिता राकेश, गीता श्री, रूपा सिंह, हीरालाल, डॉ. सुनीता,  सुबोध कुमार एवं भरत तिवारी इत्यादि हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे.    

रिपोर्ट: सुमित प्रताप सिंह 

Wednesday, December 25, 2013

वरिष्ठ साहित्यकार व गज़लकार डा0 कुँवर ‘बेचैन’ को द्वितीय संवेदना सम्मान

नयी दिल्ली। सामाजिक संस्था ‘सोच एवं वैद्यराज आरोग्य फाउन्डेशन’ की ओर से, 22 दिसंबर,2013 को, द्वितीय संवेदना सम्मान,वरिष्ठ साहित्यकार व गज़लकार डा0 कुँवर ‘बेचैन’ जी को नयी दिल्ली आई.टी.ओ. के नजदीक ’हिंदी-भवन’ में आयोजित एक भव्य-समारोह में प्रदान किया गया।यह सम्मान उन्हें वरिष्ठ साहित्यकार श्री बालस्वरुप राही, श्री कृष्ण मित्र, श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, श्री मंगल नसीम,श्री प्रवीण शुक्ल,श्री नित्यानंद तुषार, श्री अनिल असीम, श्री चेतन आनंद तथा फिल्मकार व मीडिया-कर्मी श्री प्रदीप जैन,यूनीवार्ता के चेयरमैन श्री विश्वास त्रिपाठी,शिक्षाविद डा0 अल्पना सुहासिनी, डा0 अंजू सुमन, उप-शिक्षा निदेशक श्रीमती वीना टंडन की उपस्थिति में दिया गया। इसके अलावा संस्था की पिछली काव्य-पाठ संगोष्ठी में-श्रेष्ठ काव्य पाठ के लिए-देश के विभिन्न प्रांतों से आये-17 अन्य कवि व कवित्रियों को भी सम्मानित किया गया। श्रेष्ठ काव्य-पाठ के लिए सम्मानित किये गये अन्य कवियों में शामिल थे-अनीता मौर्या, अशोक कुमार कश्यप, अनूप शर्मा,बेबाक जौनपुरी,भुवनेश शर्मा,डेनिस तिवारी, डा0कौशल किसलय, एस.डी.तिवारी, विनोद पाण्डेय,महेन्द्र चतुर्वेदी, गजेन्द्र कौशिक, रुबी अरुण,सरिता दास, विनोद  पाराशर, योगेश चौरसिया, योगेन्द्र सुन्द्रियाल व रेनू राय।
इस अवसर पर-उपस्थित साहित्यकारों ने डा0 कुँवर बेचैन के व्यक्तित्व व कृतित्व के संबंध में अपने विचार रखे।डा0 कुँवर बेचैन ने अपने गीत व गज़लों से उपस्थित सभी श्रोताओं को आत्म-विभोर कर दिया। रात्रि 10 बजे तक भी सभागार श्रोताओं से खचा-खच  भरा रहा। उन्होंने अपने जीवन से जुडे कई रोचक प्रसंग भी सुनाये-जिनका श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया। श्रेष्ठ काव्य-पाठ के लिए चुने गये उक्त कवियों में से श्रीमती सरिता दास व श्री विनोद पाराशर ने भी इस अवसर पर अपनी कुछ कविताओं का रसास्वादन श्रोताओं को करवाया।कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि व व्यंग्यकार श्री अनिल जोशी व गीतकार श्री महेन्द्र चतुर्वेदी ने किया।सोच के अध्यक्ष श्री विनय शील, वैद्यराज के अध्यक्ष-श्री अजयपलाहा-व उनकी पूरी टीम इस सफल आयोजन के लिए बधाई की पात्र है। इस तरह के आयोजनों से हिन्दी-साहित्य की जो सेवा वे कर रहे हैं,अन्य सामाजिक संस्थाओं के लिए भी अनुकरणीय है।
 कार्यक्रम की अन्य झलकियाँ