चेहरे पर मुस्कराहट चिपकी,मन अंदर से खाली-खाली
चारों ओर घुप्प-अंधेरा ,वो कहते आ गयी दिवाली I
कहाँ गये वो खील-बतासे,कहाँ गये वो खेल-तमाशे?
कमर-तोड़ मँहगाई ने, कर दी सबकी हालत माली I
कहने को हम साथ-साथ हैं, हो जाती हर रात बात है
फिर भी क्यों लगता है ? सब कुछ है जाली-जाली I
इन्टरनेट के इस दौर में, तू भी एक ई-मेल भेज दे
उसके पास भी समय कहाँ है ,चल बस हो गयी दिवाली I
****
