एक विश्वविद्यालय में
रावण के वंशजों ने
राम के वंशज का
पुतला जलाया
और जोर-जोर से
हो-हल्ला मचाया
देखो-देखो हमने
रावण को जलाया
ये देख रावण ने
अपना सिर खुजाया
और उनकी मूर्खता पर
मंद-मंद मुस्कुराया
फिर अपने वंशजों से
हँसते हुए बोला
बेटा राम से
लिया था मैंने पंगा तो
उन्होंने मुझको
लगा दिया था ठिकाने
अब तुमने उसके
वंशज को छेड़ा है
अब तुम्हारा क्या होगा
ये तो राम ही जाने।
लेखक : सुमित प्रताप सिंह
जब 56 इंची सीनों ने
गोलीं बंदूक से दागीं
दहशतगर्दों के अब्बू भागे
और अम्मी खौफ से काँपीं
ये तो सिर्फ नमूना था
अभी असल तो है बाकी...
धोखेबाजी और कायरता
जिन दुष्टों के गहने थे
गीदड़ बनकर ढेर हुए
जो खाल शेर की पहने थे
हमपे गुर्रानेवालों की रूहें
हूरों से जा मिलने भागीं
ये तो सिर्फ नमूना था
अभी असल तो है बाकी...
नापाक पडोसी देता धमकी
एटम बम बरसाने की
जबकि औकात नहीं उसकी
खुद के बल रोटी खाने की
अब जान बचाने की चिंता में
डूबा होगा वो पाजी
ये तो सिर्फ नमूना था
अभी असल तो है बाकी...
शांतिवार्ता में खोकर
हमने तो वक़्त गुजारा है
और उस बैरी ने धोखे से
खंजर ही पीठ में मारा है
ख़त्म करेंगे अब मिलके
उस मुद्दई की बदमाशी
ये तो सिर्फ नमूना था
अभी असल तो है बाकी...
दुनियावालो तुम ही समझा दो
अब भी वो होश में आ जाए
चरण वंदना कर भारत की
माफ़ी की भीख को ले जाए
वरना क्षणों में मिट जाएगा
दुनिया से मुल्क वो पापी
ये तो सिर्फ नमूना था
अभी असल तो है बाकी...