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Monday, August 26, 2013

लघु कथा: अम्मा ने कहा था

आज उषा फिर देर से आई । 
कुछ पूछने को लपकी ही थी कि उसका चेहरा देख रुक गई, वह सिर पर पल्लू रखे चेहरे को छुपाने का प्रयास कर रही थी । 

वह अंदर आई और चुपचाप बर्तन उठाये और धोने बैठ गई । उसकी एक  आँख पूरी काली थी चेहरे पर और गर्दन पर कई निशान थे । 

कुछ न पूछना ही मुझे ठीक लगा । काम निपटा कर वह अंदर आई । मुझसे रहा न गया मैंने पूंछ ही लिया “उषा क्या बात है आज फिर तुम्हारे पति ने तुम्हें .......” 

बात पूरी भी न हो पाई कि वह बीच में ही काट कर बोली – “ नहीं भाभी ये तो देवता का परसाद है।  अम्मा ने 
कहा था कि पति की हर बात, हर काम उसका परसाद समझ सिर माथे लगाना।  पति ही तुम्हारा देवता है ।
अन्नपूर्णा वाजपेयी 
कानपुर, उत्तर प्रदेश 

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निवेदक-
सुमित प्रताप सिंह,
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